आचार्य रामचंद्र शुक्ल भक्ति काल नोट्स
प्रकरण-4 (सगुणधारा : रामभक्ति शाखा) • "जगत प्रसिद्ध स्वामी शंकराचार्य जी ने जिस अद्वैतवाद का निरूपण किया था, वह भक्ति के सन्निवेश के उपयुक्त नं था। यद्यपि उसमें ब्रह्म की व्यावहारिक …
प्रकरण-4 (सगुणधारा : रामभक्ति शाखा) • "जगत प्रसिद्ध स्वामी शंकराचार्य जी ने जिस अद्वैतवाद का निरूपण किया था, वह भक्ति के सन्निवेश के उपयुक्त नं था। यद्यपि उसमें ब्रह्म की व्यावहारिक …
आचार्य रामचंद्र शुक्ल कृत हिंदी साहित्य के इतिहास से प्रकरण-3 [निर्गुण धाराः प्रेममार्गी (सूफी) शाखा] • "इस काल के निर्गुणोपासक भक्तों की दूसरी शाखा उन सूफी कवियों की है…
आचार्य रामचंद्र शुक्ल कृत हिंदी साहित्य के इतिहास से प्रकरण-2 (निर्गुण धारा-ज्ञानाश्रयी शाखा) • इस प्रकरण में ज्ञानाश्रयी शाखा के प्रमुख कवियों का वर्णन किया गया है। कवियों को इस क्रम में…
आचार्य रामचंद्र शुक्ल कृत "हिंदी साहित्य के इतिहास" से भक्तिकाल शुक्ल जी ने भक्तिकाल (पूर्व-मध्यकाल) का समय संवत् 1375 से 1700 (सन् 1318 ई. से 1643 ई. तक) तक माना है भक्तिका…
आचार्य रामचंद शुक्ल कृत "हिंदी साहित्य का इतिहास" से आदिकाल प्रकरण-4 (फुटकल रचनाएँ) • आदिकाल में मोटे तौर पर तीन तरह की भाषा मिलती है- • प्राकृत की रूढ़ियों से …
आचार्य रामचंद्र शुक्ल कृत "हिंदी साहित्य के इतिहास" से आदिकाल प्रकरण 3 (देशभाषा काव्य/वीरगाथाकाल) • इस प्रकरण में देशभाषा, उसमें रचित 'रासो' काव्य और सात ग…
आचार्य रामचंद्र शुक्ल कृत "हिंदी साहित्य के इतिहास" से आदिकाल प्रकरण 2 (अपभ्रंश काव्य) • "जब से प्राकृत बोलचाल की भाषा…
आचार्य रामचंद्र शुक्ल कृत "हिंदी साहित्य के इतिहास" से आदिकाल • आचार्य शुक्ल ने अपने ग्रंथ के 'वक्तव्य ' में आदिकाल के नामकरण पर विचार किया है- • आदिकाल में (भ…